अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस का हमला : मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल
Munesh Kumar Shukla Fri, Jun 19, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर देश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इस समझौते में पाकिस्तान की कथित भूमिका का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि यदि इस महत्वपूर्ण समझौते में पाकिस्तान को किसी प्रकार की मध्यस्थता या विशेष भूमिका मिली है, तो यह भारत की कूटनीतिक स्थिति के लिए चिंता का विषय है।
कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी विदेश नीति को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन यदि अमेरिका और ईरान जैसे महत्वपूर्ण देशों के बीच समझौते में पाकिस्तान प्रभावी भूमिका निभाता दिखाई देता है, तो यह भारत की रणनीतिक स्थिति पर प्रश्न खड़े करता है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के संबंधों का भी उल्लेख किया। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने व्यक्तिगत संबंधों को कूटनीतिक उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि वास्तविक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में भारत को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि सरकार इस पूरे मामले पर स्पष्ट जानकारी दे और बताए कि भारत की भूमिका क्या रही।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र, संतुलित और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। उनका दावा है कि भारत आज वैश्विक मंच पर पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उसकी आवाज को गंभीरता से सुना जाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विदेश नीति से जुड़े मुद्दे अक्सर घरेलू राजनीति का हिस्सा बन जाते हैं। अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर शुरू हुई यह बहस भी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने-अपने दावों के साथ जनता के बीच राजनीतिक संदेश देने में जुटी हुई हैं।
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