जंतर-मंतर पहुंचे अलख पांडे : छात्रों के समर्थन में सरकार से संवाद की अपील
Munesh Kumar Shukla Thu, Jul 23, 2026
NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच फिजिक्सवॉला (Physics Wallah) के सह-संस्थापक और सीईओ अलख पांडे का जंतर-मंतर पहुंचना पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब तक आंदोलन से दूरी बनाए रखने के आरोप झेल रहे अलख पांडे ने प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचकर उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया और सरकार से अपील की कि वह छात्रों के साथ सीधे संवाद स्थापित करे। उनके इस कदम के बाद शिक्षा जगत और सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है कि देश के प्रमुख शिक्षकों और शिक्षा उद्यमियों की ऐसी परिस्थितियों में क्या भूमिका होनी चाहिए।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अलख पांडे की आलोचना कर रही थी। संगठन का आरोप था कि देश के सबसे प्रभावशाली शिक्षकों में शामिल होने के बावजूद उन्होंने छात्रों के आंदोलन पर खुलकर अपनी बात नहीं रखी। इतना ही नहीं, संगठन ने उन शिक्षकों के बहिष्कार तक की अपील की थी जो आंदोलन का समर्थन नहीं कर रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में अलख पांडे का जंतर-मंतर पहुंचना राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदर्शन स्थल पर छात्रों को संबोधित करते हुए अलख पांडे ने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से ऊपर है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखने के बजाय छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए। उनका कहना था कि संवाद ही किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे प्रभावी माध्यम है और सरकार तथा छात्रों के बीच सीधी बातचीत से ही इस विवाद का स्थायी समाधान निकल सकता है।
अलख पांडे ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसे की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्र वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगें, तो सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों का होता है जिन्होंने पूरी ईमानदारी से तैयारी की है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों का इस तरह आगे आना आंदोलन को नई दिशा दे सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी शिक्षक या शिक्षा संस्था की भूमिका राजनीतिक पक्ष लेने की नहीं, बल्कि छात्रों के हितों की रक्षा करने की होनी चाहिए। ऐसे समय में निष्पक्ष और रचनात्मक सुझाव शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अधिक उपयोगी साबित हो सकते हैं।
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