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जमीन सौदे में बड़ा खुलासा: : रिपोर्ट आने के बाद पार्थ पवार की भूमिका पर उठे सवाल

Munesh Kumar Shukla Thu, Mar 26, 2026

महाराष्ट्र की राजनीति में पुणे के मुंधवा जमीन सौदे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले की जांच कर रही विकास खरगे समिति ने अपनी रिपोर्ट बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में पेश की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पुणे के मुंधवा क्षेत्र में स्थित करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को पार्थ पवार की सह-स्वामित्व वाली कंपनी Amadia Enterprises LLP को बेचने की प्रक्रिया नियमों के खिलाफ थी। इसमें सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है।

समिति ने पाया कि पार्थ पवार के पक्ष में बनाया गया पावर ऑफ अटॉर्नी अवैध, गलत और आपराधिक प्रकृति का था। हालांकि, समिति ने उनके खिलाफ सीधे कार्रवाई की सिफारिश नहीं की है और कहा है कि उनकी भूमिका की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकारी जमीन के संबंध में पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार करना ही नियमों के विरुद्ध है और यह मामला आपराधिक श्रेणी में आता है। यह मामला पहले से दर्ज एफआईआर और चल रही पुलिस जांच का हिस्सा भी है।

गौरतलब है कि पार्थ पवार, एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार के बेटे हैं। मुंधवा क्षेत्र की करीब 40 एकड़ सरकारी जमीन, जो राज्य सरकार के स्वामित्व में थी, उसे निजी कंपनी को बेच दिया गया, जिसमें उनकी बड़ी हिस्सेदारी बताई जाती है।

इस पूरे मामले की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव खरगे की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सौदा पूरी तरह नियमों के खिलाफ था और राजस्व, स्टाम्प व पंजीकरण विभाग के अधिकारियों ने इसमें अहम भूमिका निभाई। इसमें गंभीर लापरवाही और मिलीभगत के संकेत मिले हैं।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में शीतल तेजवानी की भूमिका का भी जिक्र किया, जिन्होंने विवादित जमीन के लिए पार्थ पवार के पक्ष में नोटरीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की थी, जिसे अवैध बताया गया है।

इसके अलावा, दिग्विजय पाटिल को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। समिति के अनुसार, उन्हें विवादित जमीन की जानकारी होने के बावजूद यह सौदा नहीं करना चाहिए था।

अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पुणे पुलिस द्वारा की जाएगी, जो समिति की रिपोर्ट के आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगी।

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