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केरल में वामपंथ का अंत : पिनरायी विजयन का इस्तीफा, यूडीएफ की ऐतिहासिक जीत

Munesh Kumar Shukla Mon, May 4, 2026

नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की करारी हार के बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे उनका करीब दस वर्षों का कार्यकाल समाप्त हो गया। राजभवन के अनुसार, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए उनसे नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने का अनुरोध किया है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ को केवल 35 सीटों पर संतोष करना पड़ा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी तीन सीटें जीतकर राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विधानसभा में अपना खाता खोला।

इस चुनाव परिणाम के साथ ही केरल में वामपंथी सरकार का अंत हो गया है और करीब पांच दशक बाद देश में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है, जब किसी भी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं है। वर्ष 1957 में ईएमएस नंबूदिरीपाद के नेतृत्व में केरल में पहली वामपंथी सरकार बनी थी, जिसने देश में गैर-कांग्रेस राजनीति को नई दिशा दी थी।

इसके बाद वाम दलों ने देश के कई हिस्सों में अपनी पकड़ मजबूत की और पश्चिम बंगाल में 1977 से लगातार 34 वर्षों तक सत्ता में रहे। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में वाम दलों का प्रभाव लगातार घटता गया और अब केरल की हार के साथ उनका देश की सत्ता से पूरी तरह सफाया हो गया है।