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हरीश राणा : इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा को अंतिम विदाई, 13 साल के संघर्ष का हुआ भावुक अंत

Munesh Kumar Shukla Wed, Mar 25, 2026

इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद हरीश राणा को बुधवार को अंतिम विदाई दी गई। दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां परिवार, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। पूरा माहौल बेहद भावुक रहा।

हरीश का जीवन 2013 में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गया था। मात्र 19 वर्ष की उम्र में वह कोमा में चले गए थे। उन्होंने जुलाई 2010 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था और 2013 में अंतिम वर्ष के छात्र थे। अगस्त 2013 में रक्षाबंधन के दिन बहन से फोन पर बात करते समय वह पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे।

इस हादसे के बाद हरीश पिछले 13 वर्षों से स्थायी वनस्पति अवस्था (परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट) में थे। वह मशीनों के सहारे जीवित थे, कभी-कभी आंखें झपकाते थे, लेकिन न बोल पाते थे और न ही हिल-डुल सकते थे।

परिवार ने लंबे समय तक इलाज और हर संभव प्रयास किया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। बेटे के लगातार दर्द को देखते हुए परिवार ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी।

हरीश को 14 मार्च को एम्स में भर्ती कराया गया था। इसके बाद डॉक्टरों ने धीरे-धीरे उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाना शुरू किया। अंतिम दिनों में उन्हें भोजन और पानी भी नहीं दिया जा रहा था, केवल दर्द और मानसिक कष्ट को कम करने के लिए दवाएं दी जा रही थीं।

इस तरह 13 साल तक चले संघर्ष के बाद हरीश राणा की जीवन यात्रा का अंत हो गया, जिसने सभी को भावुक कर दिया।