बिहार : पानी के संकट की ओर बढ़ता बिहार: घटती जल उपलब्धता से ‘वॉटर स्ट्रेस’ श्रेणी में पहुंचा राज्य
Munesh Kumar Shukla Sat, Feb 14, 2026
बिहार, टीवी भारतवर्ष
बिहार में पानी की उपलब्धता को लेकर सामने आए ताज़ा आंकड़ों ने सरकार और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है। विधान परिषद में जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, IIT पटना और जल संसाधन विभाग के संयुक्त सर्वे से स्पष्ट हुआ है कि राज्य अब जल संसाधनों के मामले में पहले जैसा समृद्ध नहीं रहा। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता तेजी से घट रही है और बिहार ‘वॉटर स्ट्रेस’ यानी जल दबाव की श्रेणी में प्रवेश कर चुका है।विशेषज्ञों के अनुसार ‘वॉटर स्ट्रेस’ की स्थिति तब मानी जाती है जब पानी की मांग उपलब्ध संसाधनों के करीब पहुंचने लगती है और भविष्य में पेयजल तथा सिंचाई दोनों पर खतरा मंडराने लगता है। बिहार में बढ़ती आबादी, खेती में अत्यधिक पानी की जरूरत और शहरीकरण ने जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण अनियंत्रित भूजल दोहन बताया जा रहा है। राज्य के कई जिलों में लोग पेयजल और सिंचाई के लिए तेजी से ट्यूबवेल और बोरिंग पर निर्भर हो गए हैं, जिससे भूमिगत जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।कभी बिहार में लगभग 600 नदियां बहती थीं, जो राज्य की जीवनरेखा मानी जाती थीं। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि सरकार को 340 नदियों को चिह्नित कर उनके पुनर्जीवन के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ रहा है। कई नदियां अतिक्रमण, गाद जमाव और प्राकृतिक जलधारा में रुकावट के कारण सिकुड़ गई हैं या मौसमी बन चुकी हैं। कुछ नदियों का अस्तित्व कागजों तक सीमित रह गया है।जल विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा, तटों पर अतिक्रमण और वर्षाजल संचयन की कमी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। यदि स्थिति यही रही तो भविष्य में खेती, पेयजल आपूर्ति और पर्यावरण संतुलन पर व्यापक असर पड़ सकता है। सरकार ने नदियों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण और भूजल प्रबंधन की योजनाओं को तेज करने की बात कही है। साथ ही लोगों से भी जल संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में बिहार के कई हिस्सों में जल संकट सामाजिक और आर्थिक चुनौती का रूप ले सकता है।
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