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लखनऊ : छोटे उद्योगों के लिए राहत भरी खबर, लखनऊ में प्रॉपर्टी टैक्स से छूट

Munesh Kumar Shukla Sat, Feb 14, 2026

लखनऊ में छोटे उद्योगों को टैक्स से राहत मिल गई है। सरकार ने सितंबर-2025 के बाद से प्रॉपर्टी टैक्स माफ कर दिए हैं। कई बड़े शहरों के मॉडल अपनाने की तैयारी चल रही है, जिसके तहत अब प्रॉपर्टी टैक्स को भी आवासीय के बराबर कर दिया जाएगा। सूक्ष्म और लघु उद्यमियों की मांग पर सरकार ने हामी भरी। उसके बाद सितंबर-2025 से लेकर अब (फरवरी-2026) तक उद्योगों पर लगने वाले प्रॉपर्टी टैक्स को आवासीय के बराबर कर दिया गया था। इससे लखनऊ के सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को करीब 30 करोड़ रुपए की राहत मिली है, जिसे उन्हें टैक्स के रूप में जमा नहीं करना पड़ा। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय राय का कहना है कि फैसला लागू होने के बाद लोगों को राहत मिली है। पहले आवासीय घरों की तुलना में 3 गुना टैक्स उद्योगों पर लगाया जाता था। अब इस मामले में कुछ बड़े शहरों के मॉडल्स पर विचार किया जा रहा है। लघु उद्योग भारती की तरफ से दिए गए प्रस्ताव और मांग के बाद सरकार की तरफ से उद्यमियों को राहत दी गई थी। अब इसके स्थाई रूप से समाधान करने की तैयारी विभाग ने शुरू कर दी है। इसको लेकर नगर निकाय सेवा से जुड़े अधिकारियों की बैठक भी हुई है। इसमें यह फैसला करने की तैयारी है कि कैसे बीच का रास्ता निकालते हुए उद्यमियों को राहत दी जाए। और नगर निगम की आय भी खत्म न हो। इसके लिए अब नासिक, अहमदाबाद, नागपुर सहित अन्य शहरों के मॉडल पर विचार किया जा रहा है कि वहां किस तरह से काम हो रहा। इसके बाद इसपर अंतिम फैसला लिया जाएगा। तालकटोरा, चिनहट, सरोजनीनगर, नादरगंज सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 1500 इकाइयां हैं। इसके अलावा शहर के अन्य हिस्सों में एमएसएमई इकाई की संख्या 1,11,587 है। यह प्रदेश में नंबर-1 पर है, जबकि गाजियाबाद 1,03,301 और कानपुर 82,323 भी लखनऊ से पीछे हैं। उद्यमियों का गृहकर आवासीय के बराबर कर दिया गया है। यह आदेश प्रदेश के 17 नगर निगमों के बाद अब सभी नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत में भी लागू कर दिया गया है। इससे कम से कम 10 लाख छोटे उद्यमियों को फायदा होगा। ये उद्यमी अभी तक आवासीय का तीन गुना हाउस टैक्स दे रहे थे। हालांकि, मध्यम श्रेणी और बड़े उद्यमियों को गृहकर का तीन गुना टैक्स देना होगा। उद्यमी बताते हैं कि गृहकर की गणना इमारत की कीमत के 15 फीसदी रेंटल वैल्यू से की जाती है। फिर उस 15 फीसदी पर 7 फीसदी गृहकर लिया जाता है। उद्यमियों को इसका तीन गुना देना पड़ता है। इस बोझ से राहत मिल गई है।