नील कत्याल : नील कत्याल का विरोध, कहा– राष्ट्रपति को संसद से लेनी चाहिए मंजूरी
Munesh Kumar Shukla Sun, Feb 22, 2026
मशहूर भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लगाने के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। कत्याल का कहना है कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से ऐसे कर लागू नहीं कर सकते और इसके लिए उन्हें अमेरिकी संसद की मंजूरी लेनी चाहिए। हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के पुराने टैरिफ संबंधी फैसलों को रद्द कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि टैक्स लगाने का प्रमुख अधिकार संसद के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। इसके बावजूद ट्रंप ने ‘सेक्शन 122’ का हवाला देते हुए 15 प्रतिशत का नया ग्लोबल टैरिफ घोषित कर दिया।कत्याल ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के न्याय विभाग ने पहले अदालत में इसके विपरीत दलील दी थी। उन्होंने कहा, “अगर ट्रंप का यह विचार इतना ही अच्छा है, तो उन्हें संसद को मनाने में कोई डर नहीं होना चाहिए। हमारे संविधान का तरीका यही है।” उन्होंने इसे संवैधानिक प्रक्रिया से हटकर उठाया गया कदम बताया।ट्रंप के इस फैसले का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है। व्हाइट हाउस अधिकारियों के अनुसार, भारत जैसे देश भी इस नए ग्लोबल टैरिफ के दायरे में आएंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘एंटी-अमेरिकन’ करार देते हुए अपने निर्णय को सही ठहराया है।नील कत्याल का जन्म शिकागो में भारतीय मूल के माता-पिता के घर हुआ था। वे येल लॉ स्कूल से शिक्षित हैं और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं।
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