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नीट पेपर लीक जांच में बड़े खुलासे : सीबीआई के रडार पर कई संदिग्ध

Munesh Kumar Shukla Thu, May 14, 2026

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने नीट पेपर लीक मामले की जांच में कई अहम खुलासे किए हैं। हालांकि अब तक किसी बड़े संगठित गिरोह की सीधी भूमिका के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि मामले में बड़े नेटवर्क की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

सूत्रों के मुताबिक जांच में सामने आया है कि कथित गेस पेपर नासिक निवासी शुभम खेमर ने हरियाणा के गुरुग्राम निवासी यश यादव को उपलब्ध कराया था। इसके बाद यश यादव ने यह पेपर राजस्थान के सीकर में दिनेश नामक व्यक्ति को भेजा। जांच एजेंसियों के अनुसार सीकर में इस गेस पेपर का पीडीएफ तैयार किया गया और उसे पासवर्ड से सुरक्षित कर विभिन्न राज्यों में साझा किया गया।

बताया जा रहा है कि दिनेश भाजपा युवा मोर्चा से जुड़ा हुआ है। उसने कथित तौर पर यश यादव से पैसे देकर पेपर खरीदा और बाद में सीकर के कुछ छात्रों को बेच दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि दिनेश का बेटा विकास सीकर में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा था और उसके दोस्तों तक यह पेपर पहुंचाया गया था। पहले इन छात्रों को एसओजी ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद पूछताछ के आधार पर सीबीआई ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

सीबीआई ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त कर उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। जांच एजेंसियां डिलीट की गई चैट और मैसेज को रिकवर करने की कोशिश कर रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर इस्तेमाल किए गए नंबरों के जरिए संदिग्धों की पहचान की जा रही है। साइबर टीम आईपी एड्रेस और लोकेशन डेटा के माध्यम से यह पता लगाने में जुटी है कि लीक पेपर किस-किस तक पहुंचाया गया।

जांच एजेंसी गिरफ्तार आरोपियों की कॉन्टैक्ट लिस्ट खंगाल रही है और उनके कॉमन संपर्कों की सूची तैयार की जा रही है। इसके जरिए चैट हिस्ट्री और डिलीट डेटा की जांच की जाएगी।

सीबीआई ने आरोपियों की बैंक डिटेल्स जुटाने के लिए संबंधित बैंकों को पत्र भेजे हैं। साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से भी पेपर तैयार करने, छपाई, सुरक्षा और वितरण प्रक्रिया से जुड़े लोगों की जानकारी मांगी गई है।

सूत्रों के अनुसार सीबीआई को ऐसे 50 से अधिक लोगों की सूची मिली है, जो नीट प्रश्नपत्र की सुरक्षा प्रक्रिया से जुड़े थे। एजेंसी अब उनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। इसके अलावा उन छात्रों से भी पूछताछ की जा रही है, जिन तक कथित लीक पेपर पहुंचा था, ताकि पूरे नेटवर्क और पीडीएफ तैयार करने वाले समूहों की पहचान की जा सके।