बांग्लादेश : सोमवार को नई संसद और प्रधानमंत्री शपथ ग्रहण की तैयारी
Munesh Kumar Shukla Sat, Feb 14, 2026
बांग्लादेश में नई संसद के लिए चुने गए सांसदों की शपथ समारोह की तैयारी चल रही है और संभावना है कि यह कल आयोजित होगा। इसके बाद नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान शपथ ग्रहण कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण 16 फरवरी की शाम या 17 फरवरी की शाम को हो सकता है, क्योंकि बांग्लादेश में परंपरा रही है कि सरकार का शपथ ग्रहण समारोह शाम के समय आयोजित किया जाता है।बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने देश के 13वें संसदीय चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बीएनपी और उसके सहयोगी दलों ने 300 सदस्यीय संसद में से 299 सीटों पर हुए मतदान में करीब 210 सीटें जीती हैं। एक सीट पर उम्मीदवार की मौत के कारण मतदान को स्थगित कर दिया गया था। इस चुनाव को देश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, खासकर जुलाई 2024 के आंदोलन के बाद, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का लंबा शासन समाप्त हुआ था।इस बार जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले इस्लामी गठबंधन ने लगभग 70 सीटें जीतकर नई संसद में मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाने का दावा किया है। इसके अलावा, अन्य छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने करीब 17 सीटें हासिल की हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने तीन सीटों के नतीजे फिलहाल रोक दिए हैं, क्योंकि वहां विजेता उम्मीदवारों के खिलाफ अदालत में मामले लंबित हैं।बीएनपी की यह जीत देश की राजनीतिक दिशा को बदलने और विपक्ष के दबदबे को कमजोर करने का संकेत देती है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इसे जनता की व्यापक सहमति और सरकार के प्रति जनभावना का परिणाम बताया है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बीएनपी ने बड़े पैमाने पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाया है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही नए शासन में कई नई नीतियों और प्रशासनिक बदलावों की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीएनपी की सरकार आर्थिक सुधारों, सामाजिक विकास और अल्पसंख्यक हितों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे सकती है। वहीं, विपक्षी गठबंधन जमात-ए-इस्लामी भी संसद में सक्रिय भूमिका निभाएगा और सरकार की नीतियों पर नजर रखेगा।इस प्रकार, बांग्लादेश का यह संसदीय चुनाव न केवल पार्टी-राजनीति में बदलाव लेकर आया है, बल्कि यह देश की भविष्य की राजनीतिक दिशा और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को भी प्रभावित करेगा।
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