कोलकाता-शंघाई सीधी उड़ान शुरू : भारत-चीन कनेक्टिविटी को नई उड़ान
Mon, Mar 30, 2026
कोलकाता और शंघाई के बीच सोमवार सुबह से सीधी हवाई सेवा शुरू हो गई है, जिससे भारत और चीन के बीच कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिला है। इस सेवा का औपचारिक शुभारंभ महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने किया। दिल्ली के बाद अब कोलकाता देश का दूसरा प्रमुख शहर बन गया है, जहां से शंघाई के लिए सीधी उड़ान उपलब्ध है।
इस रूट पर IndiGo और Air India जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने अपनी सेवाएं शुरू कर दी हैं। इस नई उड़ान सेवा से खासतौर पर उत्तर-पूर्वी भारत को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कोलकाता एक अहम गेटवे के रूप में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगा।
कोलकाता और शंघाई के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी रहे हैं। महान साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर ने 1924 से 1929 के बीच तीन बार शंघाई का दौरा किया था, और वहां उनकी दो प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। खास बात यह है कि यह नई उड़ान सेवा अप्रैल में होने वाली रवींद्र जयंती से ठीक पहले शुरू की गई है।
यह कनेक्टिविटी पूर्वी भारत और पूर्वी चीन के लोगों को और करीब लाएगी, जिससे व्यापार, पर्यटन और आपसी संबंधों को मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें पहली बार अक्टूबर 2000 में शुरू हुई थीं, लेकिन 2020 में कोविड-19 महामारी और सीमा तनाव के कारण इन्हें बंद कर दिया गया था। करीब छह साल बाद अब फिर से दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवा बहाल हो गई है, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
ईरान : ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई की अटकलें तेज, खार्ग द्वीप पर कब्जे की भी चर्चा
Mon, Mar 30, 2026
पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष को 31 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात अब भी अनिश्चित बने हुए हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और क्षेत्र में बढ़ती अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण ईरान पर संभावित जमीनी हमले की अटकलें तेज हो गई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका को आशंका है कि ईरान अपने पास मौजूद करीब 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए कर सकता है। इस खतरे को देखते हुए ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर इस यूरेनियम को कब्जे में लेने के लिए सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित योजना के तहत अमेरिकी सेना ईरान की परमाणु सुविधाओं में सुरक्षित रखे गए यूरेनियम को निकालने का प्रयास कर सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इसके लिए अमेरिकी सेना को कई दिनों तक ईरान में सक्रिय रहना पड़ सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप इस संभावित अभियान से जुड़े खतरों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि, यदि हालात मांग करते हैं तो वे इस सैन्य कार्रवाई को मंजूरी देने के लिए तैयार हैं।