Advertisment

26 जनवरी 2026 से e paper tv भारतवर्ष पढ़े हर रोज

30th June 2026

BREAKING NEWS

TV Bharatvarsh E Paper 30-06-2026

अभिजीत दीपके ने बताया- मैं भूख हड़ताल पर क्यों नहीं बैठा

ड्रोन हमलों से ऊर्जा ढांचे पर असर, हालात बने चुनौतीपूर्ण

कई देशों में टूटे तापमान के रिकॉर्ड, जलवायु परिवर्तन पर बढ़ी चिंता

ट्रस्ट से जुड़े कई प्रमुख लोगों को भेजे जा सकते हैं नोटिस

जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन जारी : अभिजीत दीपके ने बताया- मैं भूख हड़ताल पर क्यों नहीं बैठा

Munesh Kumar Shukla Tue, Jun 30, 2026

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर नीट में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन लगातार नौवें दिन भी जारी है। इस आंदोलन को अब नया समर्थन भी मिलने लगा है। पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने रविवार से आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनके इस कदम के बाद आंदोलन एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

इसी बीच सोशल मीडिया और जनसामान्य के बीच यह सवाल उठने लगा कि जब आंदोलन की अगुवाई सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके कर रहे हैं, तो वह स्वयं भूख हड़ताल पर क्यों नहीं बैठे हैं। इस सवाल का जवाब दीपके ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान दिया।

एक इंटरव्यू में यूट्यूबर समदीश भाटिया ने उनसे पूछा कि क्या वह भी आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल करेंगे। इस पर अभिजीत दीपके ने मुस्कराते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भूख हड़ताल करना उनके लिए संभव है। उन्होंने अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का जिक्र करते हुए बताया कि वह लंबे समय से माइग्रेन से पीड़ित हैं। यदि उन्हें समय पर भोजन नहीं मिलता, तो उन्हें तेज सिरदर्द होने लगता है।

दीपके ने कहा कि बचपन से ही उनकी मां उन्हें समय पर भोजन करने की सलाह देती रही हैं, क्योंकि खाना देर से मिलने पर उनकी माइग्रेन की समस्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इसी कारण वह लंबे समय तक भूखे रहकर आंदोलन का हिस्सा नहीं बन सकते। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आंदोलन के नेतृत्व और उसकी मांगों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं तथा अन्य माध्यमों से अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

दीपके के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनकी ईमानदारी और स्पष्टवादिता की सराहना की, जबकि कुछ ने सवाल उठाया कि आंदोलन का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति को स्वयं भी प्रतीकात्मक रूप से भूख हड़ताल में शामिल होना चाहिए। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े समर्थकों का कहना है कि किसी भी जनआंदोलन में हर व्यक्ति अपनी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार योगदान देता है। ऐसे में किसी नेता की भूमिका केवल भूख हड़ताल तक सीमित नहीं होती, बल्कि आंदोलन के संचालन, समन्वय और रणनीति में भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें