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राज्यसभा नामांकन विवाद : मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

Munesh Kumar Shukla Fri, Jun 12, 2026

मध्य प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामांकन रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। नटराजन ने रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा उनके नामांकन को खारिज किए जाने को असंवैधानिक, मनमाना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध बताते हुए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। इस याचिका के बाद राज्य की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी की निगाहें अब सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हैं।

याचिका में कहा गया है कि नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और चुनाव अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों का सही मूल्यांकन नहीं किया। कांग्रेस का दावा है कि उम्मीदवार ने चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया था, इसके बावजूद उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया। पार्टी नेताओं का आरोप है कि यह फैसला विपक्षी उम्मीदवार को चुनावी मुकाबले से बाहर करने का प्रयास है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राज्यसभा की तीसरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की निर्विरोध जीत लगभग तय मानी जा रही थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका ने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया है। यदि अदालत नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया में कोई त्रुटि पाती है, तो चुनाव प्रक्रिया पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनावी नियमों का पालन पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है और रिटर्निंग ऑफिसर ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक हार को कानूनी विवाद का रूप देने की कोशिश कर रही है।

इस मामले का फैसला केवल एक उम्मीदवार के भविष्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया में रिटर्निंग ऑफिसर के अधिकारों और नामांकन जांच की सीमाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ संवैधानिक विशेषज्ञों की भी नजर बनी हुई है।