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ममता बनर्जी : प्रेस वार्ता के दौरान ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए

Munesh Kumar Shukla Wed, May 6, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। चुनावी हार के एक दिन बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी प्रतिक्रिया दी।

प्रेस वार्ता के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की हार है और वे इस परिणाम को स्वीकार नहीं करतीं। इस्तीफे के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उनका कहना था कि “जब मैं हारी ही नहीं हूं, तो इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। मुझसे कोई जबरन इस्तीफा नहीं ले सकता।”

ममता बनर्जी के इस रुख पर संवैधानिक विशेषज्ञों की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में कोई बड़ी कानूनी जटिलता नहीं है, लेकिन चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद यदि सरकार बहुमत खो देती है, तो उसकी संवैधानिक स्थिति कमजोर हो जाती है। ऐसे में मौजूदा सरकार की शक्तियां सीमित मानी जाती हैं।

विशेषज्ञों ने भारतीय संविधान का अनुच्छेद 163 का हवाला देते हुए बताया कि कुछ परिस्थितियों में राज्यपाल को विशेष विवेकाधिकार प्राप्त होता है। यदि राजनीतिक स्थिति स्पष्ट न हो, तो राज्यपाल अपनी समझ के आधार पर निर्णय ले सकते हैं।

इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल ने कहा कि यदि किसी नेता को चुनाव परिणामों पर आपत्ति है, तो उसे कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सत्ता में बने रहना संवैधानिक रूप से उचित नहीं होता।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद “डॉक्ट्रिन ऑफ प्लेजर” के तहत होता है। यानी मुख्यमंत्री तभी तक पद पर रह सकता है, जब तक उसके पास विधानसभा में बहुमत हो।

उन्होंने यह भी बताया कि अगर कोई मुख्यमंत्री बहुमत खोने के बावजूद इस्तीफा नहीं देता, तो राज्यपाल के पास अधिकार होता है कि वह बहुमत वाले दल या गठबंधन के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करे। ऐसे में नई सरकार के गठन को कोई भी संवैधानिक रूप से रोक नहीं सकता।

कुल मिलाकर, ममता बनर्जी का इस्तीफा न देने का बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अंतिम फैसला बहुमत और राज्यपाल की भूमिका पर ही निर्भर करेगा।

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