बंगाल में हार के बाद टीएमसी में बगावत : अभिषेक बनर्जी पर फूटा नेताओं का गुस्सा
Munesh Kumar Shukla Thu, May 7, 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनावी हार के लिए सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। खासतौर पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर सवाल उठ रहे हैं। इस चुनाव में टीएमसी 100 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 207 सीटें जीतकर राज्य में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया।
टीएमसी की हार पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया मालदा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी की ओर से आई। उन्होंने खुलकर कहा कि पार्टी अब राजनीतिक संगठन कम और “कॉरपोरेट कंपनी” ज्यादा बन गई है। चौधरी ने चुनावी रणनीति संभालने वाली संस्था I-PAC के बढ़ते प्रभाव पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पार्टी के पुराने और जमीनी नेताओं की बात अब शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच ही नहीं पाती।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कई बार जमीनी समस्याओं और संगठन की कमजोरियों को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक पहुंचाने की कोशिश की। यहां तक कि उन्होंने व्हाट्सऐप के जरिए भी संदेश भेजे, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। चौधरी ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि ममता बनर्जी “धृतराष्ट्र” की भूमिका में नजर आईं, जिन्होंने सब कुछ देखते हुए भी अनदेखा किया।
पार्टी के अंदर असंतोष केवल एक नेता तक सीमित नहीं है। कई अन्य नेताओं ने भी अभिषेक बनर्जी की रणनीति और संगठन संचालन पर सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि टीएमसी की हार के बाद पार्टी के कई नेता पाला बदल सकते हैं। नेताओं को लग रहा है कि राज्य में बीजेपी की मजबूत सरकार बनने के बाद टीएमसी की वापसी आसान नहीं होगी, इसलिए कुछ नेता भविष्य की राजनीति को देखते हुए भाजपा की ओर रुख कर सकते हैं।
चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी नेतृत्व ने स्थिति संभालने के लिए बैठक बुलाई थी, लेकिन इस बैठक में 9 विधायक शामिल नहीं हुए। इसके बाद पार्टी में संभावित टूट की अटकलें और तेज हो गईं। हालांकि टीएमसी ने सफाई देते हुए कहा कि अनुपस्थित विधायकों ने पहले ही सूचना दे दी थी और वे अपने-अपने क्षेत्रों में चुनाव के बाद हुई हिंसा को नियंत्रित करने में जुटे हुए हैं। पार्टी का यह भी कहना है कि कुछ नेताओं को जानबूझकर उनके इलाकों में रुकने के निर्देश दिए गए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद टीएमसी अब अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रही है। आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
विज्ञापन