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कानपुर : 50 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट का काला खेल! डॉक्टरों का इंटरनेशनल रैकेट बेनका

Munesh Kumar Shukla Wed, Apr 1, 2026

अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार विदेश तक जुड़े बताए जा रहे हैं। इस गैंग ने पिछले दो वर्षों में 50 से अधिक मरीजों के अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कर करोड़ों का काला कारोबार खड़ा कर लिया।

मामला तब उजागर हुआ जब 29 मार्च को कानपुर के आहूजा हॉस्पिटल में हुए एक संदिग्ध ट्रांसप्लांट की जानकारी पुलिस को मिली। जांच के बाद पुलिस ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) से जुड़ी डॉक्टर डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, दलाल शिवम अग्रवाल और तीन अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

इस पूरे मामले में पुलिस ने 15 आरोपियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। गिरफ्तार लोगों में मेडलाइफ हॉस्पिटल, प्रिया हॉस्पिटल और आरोही हॉस्पिटल के संचालक भी शामिल हैं।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। गरीब और जरूरतमंद लोगों से 5 से 10 लाख रुपये में किडनी खरीदी जाती थी, जिसे बाद में 60 लाख से 1 करोड़ रुपये तक में बेचा जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि बिहार के रहने वाले एक छात्र आयुष से किडनी लेकर मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को ट्रांसप्लांट की गई। पूरी प्रक्रिया आहूजा हॉस्पिटल में की गई, जबकि बाद में दोनों मरीजों को गॉल ब्लैडर की बीमारी का बहाना बनाकर अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया।

पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें अब इस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में दिल्ली और नोएडा में छापेमारी कर रही हैं। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि दिल्ली-एनसीआर के कुछ अन्य डॉक्टर भी इस रैकेट में शामिल हो सकते हैं।

यह खुलासा न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाला एक बड़ा अपराध भी सामने लाता है।

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