Advertisment

26 जनवरी 2026 से e paper tv भारतवर्ष पढ़े हर रोज

1st October 2026

BREAKING NEWS

TV Bharatvarsh E Paper 01-09-2026

TV Bharatvarsh E Paper 27-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 26-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 25-08-2026

TV Bharatvarsh E Paper 23-08-2026

भारत का विदेशी मुद्रा : मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर — 709 बिलियन डॉलर के पार

Munesh Kumar Shukla Sat, Jan 31, 2026

RBI के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का प्रमुख घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (Foreign Currency Assets) भी बढ़कर 562.88 बिलियन डॉलर तक पहुंच गईं हैं, जबकि स्वर्ण भंडार का मूल्य भी 123 अरब डॉलर के करीब दर्ज किया गया है। इसी के साथ विशेष आहरण अधिकार (SDRs) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ सुरक्षित भंडार में भी मामूली वृद्धि देखी गई है।

यह रिकॉर्ड वृद्धि वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में तेजी और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में इजाफे के कारण संभव हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति के स्थिर और मजबूत होने का संकेत है, खासकर तब जब देश बजट सत्र से पहले इस उच्चतम स्तर को छूने में सफल रहा है।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, इससे पहले अगस्त 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 704.89 बिलियन डॉलर पर पहुंचा था, लेकिन अब इस नवीनतम आंकड़े ने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। हालाँकि रुपये के मूल्य में उतार-चढ़ाव के बीच भी भंडार में वृद्धि बनी हुई है, जो भारत की वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है।आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में मुद्रा भंडार का होना देश को आयात, निर्यात और चालू खाता घाटे जैसी वैश्विक परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने में सक्षम बनाता है और विदेशी निवेश आकर्षित करने में भी मदद करता है।

विशेष विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का वैश्विक रिकॉर्ड स्तर पर 709 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था पर कई सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। सबसे पहले, इतना बड़ा भंडार भारत को वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और वित्तीय संकट जैसे जोखिमों से बेहतर ढंग से सुरक्षित रखने में सहायता करेगा। चूंकि विदेशी मुद्रा भंडार में सोना और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ शामिल हैं, यह तेज़ी से बदलते अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की धार के बीच एक महत्वपूर्ण बफर (buffer) का काम करेगा, जिससे देश चालू खाता घाटा, आयात भुगतान और विदेशी ऋण सेवा जैसी जिम्मेदारियों को पूरा कर सकेगा।

दूसरे, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से भारतीय रिज़र्व बैंक के पास नोटबंदी और मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की क्षमता और बढ़ जाएगी। इससे स्थानीय मुद्रा रुपये की अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने और अचानक से विदेशी निवेश के बहिर्वाह को रोकने में मदद मिल सकती है, जिससे वित्तीय स्थिरता बनी रहती है।