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“घोस्ट मोड में तेल टैंकर” — : ईरान के खतरे के बीच बदल रही समुद्री रणनीति

Munesh Kumar Shukla Mon, May 11, 2026

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से संभावित खतरे के बीच तेल कंपनियां अब “घोस्ट शिपिंग” रणनीति अपना रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई विशाल तेल टैंकरों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पार करते समय अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए, ताकि उनकी लोकेशन सार्वजनिक रूप से ट्रैक न की जा सके।

समुद्री सुरक्षा की भाषा में इसे “डार्क सेल” कहा जाता है। इस रणनीति का इस्तेमाल आमतौर पर तब किया जाता है, जब जहाजों को हमले या निगरानी का खतरा महसूस होता है। शिपिंग एनालिटिक्स फर्मों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में इस तरह की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। खासकर वे टैंकर जो कच्चा तेल लेकर एशियाई देशों की ओर जा रहे हैं, अब ज्यादा सतर्कता बरत रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां संघर्ष बढ़ता है या शिपिंग बाधित होती है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यही वजह है कि भारत सरकार भी लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है।

समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसपोंडर बंद करना जहाजों की सुरक्षा बढ़ा सकता है, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय निगरानी और समुद्री ट्रैफिक प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं। अगर यह रणनीति लंबे समय तक जारी रहती है, तो वैश्विक शिपिंग उद्योग में नए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने पड़ सकते हैं।