ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को बड़ा झटका : अमेरिकी कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को किया रद्द
Munesh Kumar Shukla Fri, May 8, 2026
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ (आयात शुल्क) को अवैध और कानून के दायरे से बाहर बताते हुए रद्द कर दिया है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के कुछ कठोर टैरिफ फैसलों पर रोक लगा चुका है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इन टैरिफ को लागू करने के लिए जिस कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल किया गया, वह राष्ट्रपति को इतनी व्यापक आर्थिक शक्तियां नहीं देता। अदालत ने उन छोटे व्यवसायों के पक्ष में फैसला सुनाया जिन्होंने इस नीति को चुनौती दी थी। हालांकि, पीठ के एक जज ने असहमति जताते हुए कहा कि राष्ट्रपति को व्यापार और टैरिफ मामलों में व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।
यह मामला 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत लगाए गए अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ से जुड़ा था। ट्रंप प्रशासन ने इन शुल्कों को अमेरिका के व्यापार घाटे को नियंत्रित करने और घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए लागू किया था। ये टैरिफ 24 जुलाई तक प्रभावी रहने वाले थे।
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का हवाला देते हुए अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया था। इसी आधार पर कई देशों पर व्यापक आयात शुल्क लगाए गए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में साफ कर दिया था कि यह कानून राष्ट्रपति को इतने बड़े स्तर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता।
ताजा फैसले का असर फिलहाल केवल तीन वादियों पर लागू होगा, जिनमें वॉशिंगटन राज्य, मसाला कंपनी Burlap & Barrel और खिलौना निर्माता Basic Fun! शामिल हैं। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भविष्य में अन्य कंपनियों और व्यापारिक नीतियों पर भी पड़ सकता है।
फैसले के बाद जे फोरमैन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमने यह लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। यह हमारे लिए बेहद उत्साहजनक पल है।”
अब माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले को चुनौती देते हुए यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट में अपील करेगा। इसके बाद यह मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है। अमेरिकी संविधान के अनुसार कर और टैरिफ लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास होता है, हालांकि सीमित परिस्थितियों में राष्ट्रपति को कुछ शक्तियां सौंपी जा सकती हैं।
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