TVK से गठबंधन पर कांग्रेस में मतभेद : मणिशंकर अय्यर बोले- ‘यह सबसे खराब राजनीतिक अवसरवाद
Munesh Kumar Shukla Fri, May 8, 2026
पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने तमिलनाडु में कांग्रेस द्वारा तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के साथ गठबंधन किए जाने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस कदम को “बेहद खराब” बताते हुए कहा कि इससे निम्न स्तर की राजनीतिक अवसरवादिता की झलक मिलती है। अय्यर ने चेतावनी दी कि यदि इस फैसले से तमिलनाडु में भाजपा को “पिछले दरवाजे” से प्रवेश का मौका मिलता है, तो यह भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा “आत्मघाती गोल” साबित हो सकता है।
अय्यर ने कहा कि वह कल्पना भी नहीं कर सकते कि कांग्रेस के पूर्वज इस तरह की राजनीति का समर्थन करते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हाल ही में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और अब उसी TVK के साथ गठबंधन कर लिया, जिसने 23 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को हराया। उनके मुताबिक, यह महात्मा गांधी के उस सिद्धांत के खिलाफ है जिसमें राजनीति को नैतिकता और सिद्धांतों पर आधारित बताया गया था।
समाचार एजेंसी PTI से बातचीत में अय्यर ने कहा कि “स्वराज नैतिकता पर आधारित होना चाहिए” और कांग्रेस का यह फैसला उस विचारधारा से भटकाव दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तमिलनाडु में जो पांच सीटें जीतीं, वे उसकी अपनी ताकत से नहीं बल्कि DMK के साथ दशकों पुराने गठबंधन के कारण मिली थीं।
द हिंदू के तमिल संस्करण में प्रकाशित अपने लेख में अय्यर ने सवाल उठाया कि तमिलनाडु में कांग्रेस की राजनीति अब “चाणक्य की रणनीति” पर चलेगी या “महात्मा गांधी के सिद्धांतों” पर। उन्होंने कहा कि मयिलादुतुरई जैसे क्षेत्रों में DMK गठबंधन को स्पष्ट जनसमर्थन मिला था और वहां TVK को जनता ने नकार दिया था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छह विधानसभा क्षेत्रों में से पांच में DMK गठबंधन के उम्मीदवारों को जीत मिली, जिनमें कांग्रेस, DMK, DMDK और IUML के प्रत्याशी शामिल थे।
अय्यर ने कहा कि राज्यव्यापी जनादेश भले ही पारंपरिक द्रविड़ दलों के खिलाफ और सी. जोसेफ विजय की TVK के पक्ष में दिखाई दे रहा हो, लेकिन कांग्रेस का अपने पुराने सहयोगी DMK को छोड़ना राजनीतिक अवसरवाद की मिसाल है। हालांकि उन्होंने विजय को “पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष” नेता बताया, लेकिन साथ ही कहा कि राजनीति में केवल अवसरवाद के आधार पर गठबंधन करना गांधीवादी राजनीति नहीं है।
उन्होंने कहा कि पिछले 35 वर्षों से मयिलादुतुरई क्षेत्र से उनके जुड़ाव के कारण यह फैसला उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी दुख पहुंचाता है। अय्यर के अनुसार, कांग्रेस को सिद्धांतों और पुराने सहयोगियों के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखनी चाहिए थी, न कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से रास्ता बदलना चाहिए था।
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