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वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण देने पर सियासत तेज : ओवैसी बोले- ‘राष्ट्रगान के बराबर नहीं हो सकता

Munesh Kumar Shukla Fri, May 8, 2026

असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान कानूनी संरक्षण देने की बात कही गई है। ओवैसी का कहना है कि वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह एक देवी की स्तुति पर आधारित रचना है और भारत किसी एक धर्म या देवी-देवता का राष्ट्र नहीं है।

ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट करते हुए कहा कि जन गण मन भारत और उसके नागरिकों का उत्सव मनाता है, जबकि वंदे मातरम की प्रकृति अलग है। उन्होंने लिखा कि “धर्म राष्ट्र नहीं होता” और संविधान भी भारत को “हम भारत के लोग” के रूप में परिभाषित करता है, न कि “भारत माता” के नाम से।

उन्होंने वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनकी सोच मुसलमानों के प्रति नकारात्मक थी और वे ब्रिटिश शासन के प्रति सहानुभूति रखते थे। ओवैसी ने यह भी कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस ने भी वंदे मातरम को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार नहीं किया था।

संविधान का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि संविधान सभा में प्रस्तावना को देवी या ईश्वर के नाम से शुरू करने और नागरिकों की जगह “प्रजा” शब्द लिखने के सुझाव दिए गए थे, लेकिन उन्हें अस्वीकार कर दिया गया था। उनके अनुसार, भारत का मतलब उसके लोग हैं, कोई देवी-देवता नहीं।

ओवैसी के बयान पर एन रामचंदर राव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि AIMIM सांस्कृतिक एकता को धार्मिक अलगाववाद के नजरिए से देखती है। रामचंदर राव ने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने भी अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन में वंदे मातरम का विरोध नहीं किया था, लेकिन बाद में उनका रुख बदल गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि AIMIM केवल वंदे मातरम ही नहीं, बल्कि समान नागरिक संहिता, तीन तलाक समाप्त करने और राष्ट्रीय एकरूपता से जुड़े अन्य मुद्दों का भी लगातार विरोध करती रही है। उनके मुताबिक, यह राजनीति वोट बैंक और धार्मिक ध्रुवीकरण से प्रेरित है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम 1971 संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी है। प्रस्तावित संशोधन के तहत वंदे मातरम के गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध माना जाएगा। इसके बाद वंदे मातरम को भी राष्ट्रगान जन गण मन की तरह कानूनी संरक्षण प्राप्त हो जाएगा।