तमिलनाडु में सत्ता का सस्पेंस गहराया : TVK का भविष्य अब वाम दलों और VCK के फैसले पर टिका
Munesh Kumar Shukla Fri, May 8, 2026
तमिलनाडु की राजनीति इस समय पूरी तरह से सस्पेंस और उठापटक के दौर से गुजर रही है। राज्य में सरकार गठन को लेकर हर घंटे नए समीकरण बनते और बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। एक ओर अभिनेता-राजनेता थलापति विजय की पार्टी TVK समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगी हुई है, तो दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि वर्षों से एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी रहे DMK और AIADMK भी सत्ता गठन को लेकर बैकडोर बातचीत कर सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम में अब TVK की राजनीतिक दिशा तीन अहम दलों — CPI, CPM और VCK — के फैसले पर निर्भर मानी जा रही है। TVK ने इन तीनों दलों से समर्थन का अनुरोध किया है और सूत्रों के मुताबिक आज शाम तक इन पार्टियों की ओर से अंतिम निर्णय सामने आ सकता है। इन दलों के भीतर यह राय उभर रही है कि जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए TVK का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन दूसरी तरफ DMK का दबाव भी इन सहयोगी दलों पर माना जा रहा है। गौरतलब है कि CPI, CPM और VCK लंबे समय से DMK गठबंधन का हिस्सा रहे हैं।
इसी बीच तमिलनाडु के गवर्नर सी. पी. राधाकृष्णन आर्लेकर के बयान ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। चेन्नई में मौजूद गवर्नर ने साफ कहा है कि सरकार गठन के लिए सबसे अहम चीज संख्या बल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस भी दल या गठबंधन के पास 118 विधायकों का समर्थन होगा, उसी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। गवर्नर की इस टिप्पणी पर TVK और कांग्रेस ने नाराजगी जताई है।
वहीं दूसरी तरफ AIADMK प्रमुख ई. पलानीस्वामी ने पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में पार्टी विधायकों के हस्ताक्षर जुटाए हैं और गवर्नर से मिलने का समय भी मांगा है। उधर DMK नेतृत्व ने अपने सभी विधायकों को 10 मई तक चेन्नई में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। TVK ने भी आज पनयूर स्थित पार्टी कार्यालय में विधायक दल की बैठक बुलाई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर VCK और वामपंथी दल TVK को समर्थन देने से इनकार करते हैं, तो DMK-AIADMK गठबंधन की संभावना अचानक मजबूत हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, यदि ऐसा गठबंधन सत्ता में आता है तो विजय अपनी पार्टी के 107 विधायकों से इस्तीफा दिलाने जैसे बड़े कदम पर भी विचार कर सकते हैं। फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में अनिश्चितता चरम पर है और सभी की नजर अब वाम दलों और VCK के फैसले पर टिकी हुई है।
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