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डी.के. शिवकुमार : डी.के. शिवकुमार के समर्थकों ने किया शक्ति प्रदर्शन कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व विवाद तेज

Munesh Kumar Shukla Fri, Feb 27, 2026

कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार में नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थक विधायकों ने बेंगलुरु के एक निजी होटल में शक्ति प्रदर्शन करते हुए पार्टी आलाकमान से शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद पर स्थापित करने का रास्ता साफ करने की मांग की है। मगाडी के विधायक एच.सी. बालकृष्ण द्वारा आयोजित इस बैठक में लगभग 40 समान विचारधारा वाले विधायक शामिल हुए। हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर बालकृष्ण के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मिलन समारोह बताया गया, लेकिन अंदरूनी चर्चा पूरी तरह से नेतृत्व परिवर्तन पर केंद्रित थी। बालकृष्ण ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने शुक्रवार को बेंगलुरु नहीं रहने के कारण बृहस्पतिवार को सभी विधायकों को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा, "हमारे क्षेत्रों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लगातार सवाल उठते हैं। जब तक इस मुद्दे का समाधान नहीं होगा, हमें और पार्टी को भविष्य में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।"उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायकों को अलग-अलग बुलाने से समाधान नहीं निकलेगा, जबकि सभी का एकत्रित होना विषय पर खुली चर्चा को संभव बनाता है। कई विधायकों का मानना है कि इस विवाद के चलते उनकी राजनीतिक स्थिति और 2028 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।बालकृष्ण ने कांग्रेस के कर्नाटक इकाई अध्यक्ष पद में बदलाव की मांग पर कहा कि यदि शीर्ष नेतृत्व चाहे तो बदलाव किया जा सकता है, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य पार्टी के भीतर स्थिति को अंतिम रूप देना है। उन्होंने कहा, "हम केवल अंतिम निर्णय चाहते हैं। अध्यक्ष बदलें या कोई और, यह मुख्य बात नहीं है। हमारी मांग है कि भ्रम समाप्त हो।"राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक छह मार्च से शुरू हो रहे कर्नाटक विधानसभा बजट सत्र से लगभग एक सप्ताह पहले हुई, जो समय बहुत संवेदनशील माना जा रहा है। कुछ विधायकों ने संकेत दिया कि वे चाहते हैं कि शिवकुमार मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का स्थान लें।कर्नाटक में सत्ता संघर्ष नवंबर 2025 से तेज हुआ, जब कांग्रेस सरकार ने अपने ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। माना जाता है कि पार्टी नेतृत्व के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत सिद्धरमैया पहले ढाई वर्ष मुख्यमंत्री रहेंगे और उसके बाद शिवकुमार कार्यभार संभालेंगे। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई। शिवकुमार समय-समय पर इस संभावना का संकेत देते रहे हैं, जबकि सिद्धरमैया का कहना है कि वे पूरे पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेंगे।यह बैठक राज्य में नेतृत्व विवाद की गहराई और पार्टी आलाकमान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति को उजागर करती है।

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