ओम प्रकाश राजभर : ओम प्रकाश राजभर ने आजमगढ़ में ब्राह्मण रैली की- समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना
Munesh Kumar Shukla Tue, Feb 24, 2026
उत्तर प्रदेश की राजनीतिक हलचल के बीच ओम प्रकाश राजभर ने आजमगढ़ में एक भव्य रैली आयोजित की, जिसमें करीब 10 हजार ब्राह्मणों ने हिस्सा लिया। रैली में ब्राह्मण समाज के सम्मान में नारे और कसीदे लगाए गए, जैसे “जय सुहेलदेव” और “जय परशुराम।” इस दौरान राजभर ने अपनी निशाने पर समाजवादी पार्टी (सपा) को रखा।राजभर का यह कदम ब्राह्मण वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए किए गए सोशल इंजीनियरिंग के प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह रणनीति जोखिमभरी भी है, क्योंकि पिछले समय में बीएसपी और मायावती ने दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के कई प्रयोग किए, जो अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। 2007 के बाद मायावती के कई प्रयास असफल रहे और 2022 में उनकी पार्टी यूपी में केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित रह गई।ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी के भीतर भी ब्राह्मण और ठाकुर समूहों के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही है, ओम प्रकाश राजभर ने अलग मोर्चा संभाला है। आजमगढ़ में उन्होंने ओबीसी-ब्राह्मण गठजोड़ की नींव रखी है, जो सपा के मजबूत गढ़ के रूप में जाना जाता है।रैली में राजभर ने दावा किया कि आगामी चुनाव में आजमगढ़ की सभी 10 सीटें एनडीए के पास जाएंगी। फिलहाल जिले की सभी 10 विधायक सपा के हैं और लोकसभा में भी आजमगढ़ का प्रतिनिधित्व सपा के धर्मेंद्र यादव और दूसरी लालगंज सीट पर भी सपा के पास है। राजभर ने कहा कि यह रैली 2027 के विधानसभा चुनाव का शंखनाद है और यहां की भीड़ सपा को हराने का काम करेगी।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण आबादी लगभग 12 प्रतिशत है, जो सवर्णों में सबसे अधिक है, जबकि ठाकुरों की आबादी लगभग 8 प्रतिशत है। ब्राह्मण कभी-कभी जाति के आधार पर उम्मीदवार या पार्टी चुनने में विभाजित रहते हैं।राजभर ने बताया कि वह महीने में करीब सात दिन आजमगढ़ में ही रहते हैं और वहां लगातार संगठन को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ होने के बावजूद बीजेपी में शामिल होकर अपनी राजनीतिक दिशा बदल ली।विश्लेषकों का मानना है कि ओम प्रकाश राजभर का यह कदम यूपी की आगामी राजनीतिक लड़ाई में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने और समाजवादी पार्टी के गढ़ पर हमला करने की रणनीति का हिस्सा है।
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