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admin Tue, Sep 6, 2022

उन्नाव    किसी ने सोंचा नही था कि   4 सितम्बर 2004  की मनहूस रात उन्नाव के  अजेय अजीत सिंह की अन्तिम रात होगी।
 किसी ने सोंचा नही था की सैकडों असलहाधारी सुरक्षाकर्मियों के साथ चलने वाला इस दुनिया से इस तरह विदा हो जायेगा?
जिस अजीत सिंह की उन्नाव लखनऊ में तूती बोलती थी बड़े बड़े अधिकारी नेता थर थर कांपते थे उस अजीत सिंह की मौत की पटकथा लिखने वालों ने उन्नाव के इस नेता को इस दुनिया से विदा कर दिया।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे अजीत सिंह ने भारतीय जनता पार्टी को छोंड़कर समाजवादी पार्टी ज्वाईन की थी 2004 का लोकसभा का चुनाव था अजीत सिंह पहले भाजपा से सांसद पद का टिकट मांग रहे थे फिर भाजपा से देवीबक्स सिंह को मिल जाने से सपा में चले गये।चूँकि अजीत सिंह का उन्नाव और लखनऊ दोनो जिलो ने दबदबा था और mlc पद को पहली बार लोंगों ने अजीत सिंह के जमाने में महसूस  किया था ठीक से जाना था।समाजवादी पार्टी में जाने के बाद अपने आपको उसके तौर तरीकों में ढाल ही रहे थे कि 2004 की 4 सितम्बर की रात उत्तर प्रदेश के कुछ ऐसे  ताकतवर लोगों ने जो अजीत सिंह को हजम नहीं कर पा रहे थे ने अजीत सिंह की हत्या की पटकथा लिख दी। ब्यवस्था ऐसी की कि शासन और प्रशासन भी कुछ नहीं कर पाया।
   
कुछ ऐबंद करा देंगे.