सुप्रीम कोर्ट : सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला,देश में पहली बार इच्छामृत्यु की अनुमति
Munesh Kumar Shukla Wed, Mar 11, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसले में 31 वर्षीय युवक को पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी। गाजियाबाद निवासी हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से कोमा में हैं और जीवन रक्षक उपकरणों के सहारे जिंदा हैं।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने यह फैसला हरीश के माता-पिता की याचिका पर सुनाया। कोर्ट ने एम्स को निर्देश दिया है कि मरीज को पेलिएटिव केयर में भर्ती कर जीवनरक्षक उपचार को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि पूरी प्रक्रिया में मरीज की गरिमा और सम्मान का ध्यान रखा जाए।
पैसिव यूथेनेशिया का मतलब है कि गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए दिए जा रहे लाइफ सपोर्ट या इलाज को बंद कर दिया जाए, ताकि वह प्राकृतिक रूप से मृत्यु को प्राप्त हो सके। वहीं एक्टिव यूथेनेशिया, जिसमें दवा देकर मौत दी जाती है, भारत में अभी भी अवैध है।
हरीश राणा के माता-पिता ने अदालत से दया की अपील करते हुए कहा था कि उनका बेटा पिछले 13 साल से बेहोशी की हालत में है और उसे कोई सुधार नहीं दिख रहा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला देश में इच्छामृत्यु से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
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