कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की आहट : सिद्धारमैया से पद छोड़ने के संकेत
Wed, May 27, 2026
कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। मंगलवार को कांग्रेस आलाकमान और कर्नाटक के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकों का दौर चला, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गंभीर चर्चा हुई। खबर है कि पार्टी हाईकमान ने सिद्धारमैया से पद छोड़ने को कहा है।
जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी से मुलाकात से पहले ही सिद्धारमैया को राजनीतिक परिस्थितियों का अंदाजा हो गया था। यही वजह रही कि वे करीब एक दर्जन मंत्रियों को विशेष विमान से अपने साथ दिल्ली लेकर पहुंचे। बताया जा रहा है कि उनकी रणनीति पहले कैबिनेट फेरबदल की मांग रखने की थी और जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ मंत्रियों के जरिए अपनी बात को मजबूती से रखने की तैयारी भी की गई थी।
हालांकि बैठक के दौरान घटनाक्रम पूरी तरह अलग दिशा में चला गया। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से राय मांगने के बजाय सीधे यह प्रस्ताव रखा कि वे राज्यसभा जाएं और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की जिम्मेदारी संभालें। साथ ही उनसे मुख्यमंत्री पद छोड़ने का संकेत भी दिया गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान सिद्धारमैया को अपनी बात विस्तार से रखने का अवसर नहीं मिला।
सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा जाने के प्रस्ताव पर सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी राष्ट्रीय राजनीति में जाने की फिलहाल कोई इच्छा नहीं है और उन्हें इस बारे में सोचने के लिए कुछ समय चाहिए। बैठक यहीं समाप्त हो गई और उनसे कहा गया कि वे अपना अंतिम फैसला कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को बता दें।
बैठक के बाद सिद्धारमैया ऊर्जा मंत्री के. जे. जॉर्ज के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने अन्य मंत्रियों से चर्चा की। बताया जा रहा है कि उन्होंने मंत्रियों से कहा कि हाईकमान अपने फैसले पर कायम है और उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने का मौका नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने तुरंत बेंगलुरु लौटने का फैसला किया। वहीं केसी वेणुगोपाल को भी यह संदेश भेज दिया गया कि सिद्धारमैया फिलहाल राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं और वे गुरुवार तक अपना अंतिम निर्णय ले सकते हैं।
पश्चिम एशिया संकट का असर भारत पर : रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी: क्रिसिल रिपोर्ट
Wed, May 27, 2026
वैश्विक स्तर पर बढ़ते पश्चिम एशिया तनाव का असर अब भारत के उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है। CRISIL की ताजा क्विकनॉमिक्स रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा और कमोडिटी कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण आने वाले समय में रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट की वजह से कच्चे तेल के साथ-साथ तांबा, एल्युमीनियम, प्लास्टिक, गैस और रसायनों जैसी औद्योगिक सामग्रियों की कीमतों में भी तेजी आई है। इससे कंपनियों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।
क्रिसिल ने बताया कि अप्रैल 2026 में उसका डब्ल्यूपीआई आधारित इनपुट-आउटपुट अनुपात 44 महीनों में पहली बार 1.0 के पार पहुंच गया। यह संकेत देता है that कंपनियों की इनपुट लागत, उत्पादों की बिक्री कीमतों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक इनपुट कीमतों में 6.2 प्रतिशत की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि तैयार उत्पादों की कीमतों में केवल 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सरल शब्दों में कहें तो कंपनियां सामान बनाने में पहले से कहीं ज्यादा खर्च कर रही हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने लागत का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। हालांकि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कंपनियां कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान ने केवल तेल बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक औद्योगिक सप्लाई चेन को भी प्रभावित किया है। विशेष रूप से तांबा और एल्युमीनियम जैसी महत्वपूर्ण धातुओं की बढ़ती कीमतों ने निर्माण क्षेत्र और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है।