ईरान-अमेरिका तनाव के बीच चीन सक्रिय : बीजिंग में अराघची-वांग यी की अहम बैठक
Wed, May 6, 2026
ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव अभी भी बरकरार है, हालांकि बैकचैनल कूटनीति के जरिए बातचीत जारी रहने की खबरें हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को फिलहाल रोक दिया है, ताकि ईरान के साथ संभावित समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचे। बीजिंग में उनकी मुलाकात चीन के विदेश मंत्री वांग यी से हुई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने ईरान-अमेरिका तनाव, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ हफ्तों में दोनों नेताओं के बीच कई बार फोन पर भी बातचीत हो चुकी है।
अराघची का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब ट्रंप 14-15 मई को चीन के दौरे पर जाने वाले हैं और उनकी मुलाकात शी जिनपिंग से प्रस्तावित है। ऐसे में ईरानी विदेश मंत्री की यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से काफी अहम मानी जा रही है और इसे ट्रंप के लिए एक रणनीतिक चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।
ईरान और चीन के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। चीन, ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जबकि ईरान अपने आयात के लिए बड़े पैमाने पर चीन पर निर्भर करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, दोनों देशों के लिए खास महत्व रखता है। ऐसे में इस जलमार्ग की स्थिरता और निर्बाध संचालन दोनों की प्राथमिकता बनी हुई है।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में चीन की सक्रियता और ईरान के साथ उसकी नजदीकियां क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती हैं, खासकर तब जब अमेरिका के साथ उसके संबंध पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।
नेपाल : नेपाल ने लिपुलेख मार्ग से कैलाश यात्रा पर जताई आपत्ति, भारत-चीन को दी जानकारी
Sun, May 3, 2026
नेपाल ने लिपुलेख दर्रे के जरिए प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। यह यात्रा भारत और चीन के सहयोग से आयोजित की जाने की योजना है, जिसे लेकर नेपाल ने अपनी असहमति जताते हुए कहा है कि संबंधित क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आता है।
नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति दोनों देशों को कूटनीतिक माध्यमों से अवगत करा दी है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मीडिया में सामने आई खबरों के बाद सरकार ने इस विषय पर संज्ञान लिया और अपनी चिंताओं को औपचारिक रूप से साझा किया।
नेपाल का कहना है कि वर्ष 1816 की सुगौली संधि के अनुसार महाकाली नदी के पूर्व स्थित लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र उसके अभिन्न हिस्से हैं। इसी आधार पर नेपाल ने लिपुलेख मार्ग से प्रस्तावित यात्रा का विरोध किया है।
सरकार ने भारत से आग्रह किया है कि विवादित क्षेत्र में सड़क निर्माण, सीमा व्यापार या तीर्थ यात्रा से जुड़ी कोई भी गतिविधि न की जाए। साथ ही, चीन को भी आधिकारिक रूप से सूचित किया गया है कि यह इलाका नेपाल के दावे के अंतर्गत आता है।
नेपाल ने यह भी कहा कि वह दोनों पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहता है और सीमा विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का कहना है कि ऐतिहासिक संधियों, नक्शों और तथ्यों के आधार पर शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे का हल संभव है।