मजदूर लौटे काम पर : नोएडा में बवाल के बाद हालात काबू में!
Wed, Apr 15, 2026
गौतम बुद्ध नगर के औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से जारी फैक्ट्री श्रमिकों का हिंसक विरोध प्रदर्शन अब पूरी तरह शांत हो गया है। प्रशासन और सरकार के सक्रिय हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रण में आ चुकी है। लक्ष्मी सिंह ने पुष्टि की है कि श्रमिकों की प्रमुख मांगें मान ली गई हैं और अब अधिकांश कर्मचारी अपने काम पर लौट आए हैं।
इंडिया टीवी से बातचीत में लक्ष्मी सिंह ने बताया कि समय रहते उठाए गए कदमों के चलते हालात बिगड़ने से बच गए। कंपनियों ने मजदूरों की कई अहम मांगों को स्वीकार किया है, जिनमें वेतन वृद्धि, ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित करना और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों के समाधान के लिए समितियों का गठन शामिल है। फैक्ट्रियों के बाहर संशोधित वेतन से जुड़े नोटिस भी लगाए गए हैं, जिससे श्रमिकों का भरोसा फिर से कायम हुआ है।
पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त जारी है। अब तक इस मामले में 7 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी पहचान की है, जिन पर श्रमिकों को भड़काने और माहौल खराब करने के आरोप हैं।
कमिश्नर ने यह भी खुलासा किया कि हिरासत में लिए गए कुछ लोग संबंधित फैक्ट्रियों के नियमित कर्मचारी नहीं थे, जबकि कुछ हाल ही में जुड़े थे और उन पर विरोध को उकसाने में भूमिका निभाने का शक है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
परिसीमन पर बड़ा बवाल! : पी. चिदंबरम बोले- ‘850 सीटों का खेल एक भ्रम
Wed, Apr 15, 2026
पी चिदंबरम ने परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कोयंबटूर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को “भ्रम और धोखा” करार दिया और निष्पक्ष परिसीमन प्रक्रिया की मांग की। उन्होंने तीन दिवसीय विशेष संसद सत्र के समय पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति हो सकती है।
चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावों के चलते कई विपक्षी सांसद संसद में मौजूद नहीं रह पाएंगे, जिसका फायदा उठाकर सरकार बिना पर्याप्त चर्चा के विधेयक पारित करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर अचानक संसद बुलाई जाती है, तो विपक्ष को प्रस्ताव के प्रावधानों को समझने का भी समय नहीं मिलेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया चाहते हैं। उनके मुताबिक, अचानक कुछ राज्यों—जैसे मध्य प्रदेश—की सीटों में 50% वृद्धि की बात करना संदेह पैदा करता है और यह राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम लगता है।
पी चिदंबरम ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में रही है और 2023 में भी इस विधेयक का समर्थन किया था। लेकिन अब 30 महीने बाद अचानक इसे लागू करने की जल्दबाजी सवाल खड़े करती है।
वहीं एमडीएमके नेता दुरई वाइको ने भी परिसीमन के समय को लेकर चिंता जताई और कहा कि यह तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के साथ टकरा रहा है, जिससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
इस पूरे मुद्दे ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ सरकार बड़े बदलाव की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर खतरा बता रहा है।
AAP में बड़ा सियासी धमाका! : राघव चड्ढा पर ‘विश्वासघात’ का आरोप
Wed, Apr 15, 2026
आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहा संकट अब खुलकर सामने आ गया है और मामला गंभीर राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। हाल ही में पार्टी ने अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया, जिसके बाद उनकी सुरक्षा भी वापस ले ली गई। लेकिन इस घटनाक्रम ने नया मोड़ तब लिया जब केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर दी।
इसी बीच, राघव चड्ढा की जगह उपनेता बनाए गए अशोक कुमार मित्तल के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी ने सियासी माहौल और गरमा दिया। पंजाब और हरियाणा में करीब 10 जगहों पर हुई इस कार्रवाई में जालंधर और गुरुग्राम के ठिकाने शामिल हैं, जिनमें लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसर भी हैं। मित्तल इस विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं और यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के तहत की गई है।
इस घटनाक्रम के बाद AAP ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया और साथ ही राघव चड्ढा पर भी निशाना साधते हुए उन्हें “विश्वासघाती” तक कह दिया। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस कार्रवाई को चुनावी रणनीति बताया, जबकि मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने केंद्र पर एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए। पार्टी प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने सवाल किया कि क्या भाजपा बिना जांच एजेंसियों के सहारे चुनाव लड़ सकती है?
वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि जांच एजेंसियां केवल भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई कर रही हैं और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
गौरतलब है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाया गया। पार्टी के अंदर उन पर आरोप लगे कि उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर काम किया और कई अहम मौकों पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई। हालांकि, चड्ढा ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए।
अब यह मामला सिर्फ आंतरिक मतभेद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खुली सियासी जंग का रूप ले चुका है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।