वृंदावन में यमुना हादसा : 30 सैलानियों से भरा स्टीमर पलटा
Fri, Apr 10, 2026
वृंदावन में शुक्रवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया, जब यमुना नदी में करीब 30 पर्यटकों से भरा एक स्टीमर अचानक पलट गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
बताया जा रहा है कि स्टीमर पीपा पुल से टकराने के बाद असंतुलित होकर पलट गया, जिससे उसमें सवार सभी लोग नदी में गिर गए। सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई और तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।
अब तक एक पर्यटक का शव बरामद किया गया है, जबकि बाकी लोगों की तलाश जारी है। प्रशासन ने आसपास के अस्पतालों को अलर्ट कर दिया है और घायलों के इलाज की पूरी तैयारी की जा रही है।
मौके पर डीएम और एसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय गोताखोर गहरे पानी में डूबे लोगों की तलाश में जुटे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में जुटी भीड़ के कारण बचाव कार्य में कुछ दिक्कतें भी आ रही हैं।
प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे शांति बनाए रखें और रेस्क्यू टीम का सहयोग करें, ताकि सभी लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
पवन खेड़ा : पवन खेड़ा को कोर्ट से मिली बड़ी राहत
Fri, Apr 10, 2026
राजनीतिक बयानबाजी के चलते नेताओं के कानूनी विवादों में घिरने के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। ताजा मामला पवन खेड़ा से जुड़ा है, जो इन दिनों राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह विवाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर दिए गए बयान से जुड़ा है, जिसमें खेड़ा ने एक से अधिक पासपोर्ट होने का आरोप लगाया था।
इस मामले में अब खेड़ा को बड़ी राहत मिली है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को संबंधित कोर्ट में आवेदन दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत सीमित अवधि और कुछ शर्तों के साथ दी गई है। हालांकि विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन इस फैसले से फिलहाल पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।
बताया जा रहा है कि यह याचिका हैदराबाद में दायर की गई थी, जहां पवन खेड़ा का निवास भी है।
जस्टिस यशवंत वर्मा : जले हुए नोटों के विवाद में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा
Fri, Apr 10, 2026
यशवंत वर्मा, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट में तैनात थे, ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके दिल्ली स्थित आवास से पिछले साल मार्च में भारी मात्रा में जले हुए नोट मिलने के बाद से यह मामला लगातार सुर्खियों में था।
इस विवाद के बाद उनके खिलाफ आंतरिक जांच शुरू की गई थी और उन्हें न्यायिक कार्य से अलग कर दिया गया था। साथ ही, उनका तबादला दिल्ली से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था।
मामला बढ़ने के साथ ही उनके खिलाफ महाभियोग लाने की भी चर्चा तेज हो गई थी। संसद में कई सांसदों ने उन्हें पद से हटाने के लिए नोटिस भी दिया था और इस मुद्दे पर एक कमेटी का गठन किया गया था।
इसी बढ़ते दबाव और जांच के बीच जस्टिस वर्मा ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा देकर इस पूरे विवाद में बड़ा मोड़ ला दिया है।