युद्ध का असर भारत में : पेट्रोल-डीजल महंगा, कीमतों में उछाल
Thu, Mar 26, 2026
इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। नायरा एनर्जी ने देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। पेट्रोल 5.30 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ा है।
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव और तेल आपूर्ति पर पड़ा दबाव है। दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक बाजार और भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है। कीमतों की बात करें तो हैदराबाद में पेट्रोल 107.46 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जो देश में सबसे ज्यादा है। मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार बना हुआ है। वहीं डीजल की कीमत भी हैदराबाद में 95.70 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही महंगाई पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर रोजमर्रा की चीजों पर पड़ता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्थिति को लेकर लोगों को भरोसा दिलाया है कि देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों के चलते कई जगहों पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें भी देखने को मिलीं। लेकिन अधिकारियों ने साफ किया है कि सप्लाई सामान्य है और घबराने की जरूरत नहीं है। अगर वैश्विक स्तर पर हालात और बिगड़ते हैं, तो सरकार टैक्स में राहत या अन्य उपायों के जरिए कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकती है। फिलहाल, बाजार और आम जनता दोनों की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हुई है।
सिद्धिविनायक मंदिर में चोरी : स्टाफ ही निकला आरोपी, 8 गिरफ्तार
Thu, Mar 26, 2026
मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में चोरी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें मंदिर के स्टाफ की ही संलिप्तता पाई गई है। पुलिस ने अब तक 80,000 रुपये नकद बरामद किए हैं और इस मामले में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में खुलासा हुआ कि चोरी उस समय की जाती थी जब दान पेटियों को एक कमरे से दूसरे कमरे में ले जाया जा रहा होता था। आरोपियों ने शक से बचने के लिए पेटियों से उंगलियों के जरिए धीरे-धीरे पैसे निकाले। बताया जा रहा है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ही इस पूरी साजिश में शामिल था और बाद में चोरी की रकम आपस में बांट लेता था।
यह सिलसिला पिछले दो महीनों से चल रहा था। शनिवार को एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। कुछ आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं, जबकि अन्य को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों में राजेंद्र पेंडुरकर, शरद घाडी, समीर शिवालकर, अरविंद कडगे, अनिल रहाटे, पद्माकर आडकर, अभिषेक मुलिक और महेंद्र भाईजे शामिल हैं। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
कर्नाटक : कर्नाटक में छात्रों के स्क्रीन टाइम पर सख्ती की तैयारी
Wed, Mar 25, 2026
कर्नाटक सरकार ने 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के डिजिटल उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक नई ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इस पॉलिसी में पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए रोजाना स्क्रीन टाइम अधिकतम 1 घंटे तय करने की सिफारिश की गई है। साथ ही शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने का सुझाव भी दिया गया है।
ड्राफ्ट के अनुसार, छात्रों को सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूर रहने की सलाह दी गई है। मोबाइल उपयोग के लिए ‘चाइल्ड प्लान’ का सुझाव दिया गया है, जिसमें ऑडियो-ओनली विकल्प और तय समय के बाद इंटरनेट बंद करने जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। उम्र के अनुसार डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित करने की भी बात कही गई है।
सरकार का कहना है कि लगभग 25% किशोर इंटरनेट की लत से प्रभावित हैं, जिससे नींद की कमी, चिंता और ध्यान भटकने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पॉलिसी तैयार की गई है।
स्कूलों में भी कई बदलाव प्रस्तावित हैं। डिजिटल वेल-बीइंग और ऑनलाइन सुरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। साइबर बुलिंग, प्राइवेसी और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। हर स्कूल में डिजिटल उपयोग नीति लागू होगी, साथ ही ‘डिजिटल डिटॉक्स डे’ और ‘टेक-फ्री पीरियड’ भी शुरू किए जाएंगे। छात्रों से संपर्क के लिए व्हाट्सऐप की जगह पारंपरिक डायरी का उपयोग बढ़ाया जाएगा।
मेंटल हेल्थ पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्कूलों में काउंसलिंग सिस्टम को मजबूत किया जाएगा और शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे डिजिटल लत के संकेत पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर बच्चों को विशेषज्ञों तक पहुंचा सकें।
इस पॉलिसी में शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। जहां शिक्षक बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखेंगे, वहीं अभिभावकों को घर में स्क्रीन टाइम तय करने, नो-फोन जोन बनाने और खुद उदाहरण पेश करने की सलाह दी गई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर भी गाइडलाइन बनाने की बात कही गई है, ताकि होमवर्क में इसके गलत इस्तेमाल और नकल को रोका जा सके।
यह ड्राफ्ट पॉलिसी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, कर्नाटक स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी, निमहांस और शिक्षा विभाग के सहयोग से तैयार की गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले 6 मार्च को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट भाषण में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्ती की घोषणा की थी। कर्नाटक ऐसा कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।